निजी स्कूलों वाले कर रहे हैं मनमानी अपनी ही विद्यालय से कॉपी किताब और बैक खरीदने का अभिभावकों पर बना रहे हैं दबाव

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निजी स्कूलों वाले कर रहे हैं मनमानी अपनी ही विद्यालय से कॉपी किताब और बैक खरीदने का अभिभावकों पर बना रहे हैं दबाव

जिले में निजी स्कूलों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है नए सेशन के नामांकन के साथ ही अभिभावकों का आर्थिक शोषण भी शुरू हो गया है तो दूसरी ओर स्कूलों की मनमानी से अवगत अधिकारी शिकायत नहीं होने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं

दरअसल शिक्षा विभाग को निजी स्कूल संचालक को लेकर भले ही कई नियम बनाए गए हैं लेकिन धरातल पर स्कूल संचालकों को इन नियम कानून से कोई लेना देना नहीं है तो अधिकारियों ने भी इस पर ध्यान देना छोड़ दिया है इसकी वजह से विभिन्न शुल्क के नाम पर तो अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो ही रहा है साथ में अब किताब कॉपी और बैक के नाम पर भी अभिभावकों से पैसे वसूल किया जा रहे हैं

जिले के कुछ बड़े स्कूलों को छोड़कर अधिकांश जगहों पर अभिभावकों पर किताब कॉपी और बैग स्कूल से ही खरीदने का दबाव बनाया जा रहा है बाजार में ₹40 में उपलब्ध कॉपी को स्कूल के माध्यम से ₹80 में बेचा जा रहा है कॉपी में बस स्कूल का नाम प्रिंट करवा कर स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी रकम वसूल रहे हैं इसी तरह बैग और किताबों की को लेकर भी अभिभागों पर दबाव बनाया जा रहा है

किताब और ड्रेस के लिए स्कूलों का अपना दुकान निश्चित है जिले के कुछ भरे स्कूलों को छोड़कर अधिकांश निधि स्कूल का किताब और ड्रेस के लिए अपना एक दुकान निश्चित है नामांकन के बाद स्कूल की ओर से दुकान अभिभावकों को दुकान की जानकारी दी जाती है और वहीं से किताब खरीदारी का दबाव बनाया जाता है अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों से मनमाने दाम पर किताब कॉपी और बैग बेचा जाता है अलग-अलग फीस के नाम पर भी आर्थिक शोषण हो रहा है बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारी उदासीन बने हैं इस वजह से स्कूल प्रबंधन का भी मनोबल बढ़ता जा रहा है

कार्रवाई के लिए किया जा रहा है शिकायत का इंतजार

स्कूलों से विभिन्न माध्यम से अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है इससे शिक्षा विभाग के अधिकारी भी अवगत हैं लेकिन शिकायत नहीं होने की बात कह कर अधिकारी अपना पलाधार रहे हैं एक तरफ अभिभावकों का कहना है कि अगर शिकायत किया गया तो बच्चे को स्कूल से निकाल दिया जाएगा या फिर उन तरीके से परेशान किया जाएगा तो दूसरी ओर डीपीओ ने बताया कि स्कूलों से अभिभावक पर किताब कॉपी खरीदने के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जा सकता है शिकायत मिलने पर इस पर कार्रवाई की जाएगी

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